समस्तीपुर : विश्व लंग कैंसर दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान लंग कैंसर के मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान के अलावा अब तेजी से बढ़ता वायु प्रदूषण भी लंग कैंसर का बड़ा कारण बनकर सामने आ रहा है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार प्रत्येक चार लंग कैंसर मामलों में से एक का संबंध वायु प्रदूषण से है। समस्तीपुर जिला भी इससे अछूता नहीं है। जिले के सदर अस्पताल से गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और एम्स रेफर किया जाता है।

चिकित्सकों के अनुसार पहले जहां लंग कैंसर के मामले अपेक्षाकृत कम आते थे, वहीं अब हर महीने कई नए मरीज सामने आ रहे हैं। खास बात यह है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। सदर अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश कुमार का कहना है कि पहले लंग्स कैंसर को केवल धूम्रपान करने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। घरों में लकड़ी, उपले और कोयले के धुएं में लंबे समय तक रहना, खेतों में पराली जलाने से फैलने वाला धुआं, सड़क की धूल, डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं और औद्योगिक प्रदूषण भी फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं।

डॉक्टर के अनुसार लंग कैंसर का एडेनोकार्सिनोमा प्रकार अब तेजी से बढ़ रहा है। यह बीमारी कई ऐसे लोगों में भी मिल रही है जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। डॉक्टर का मानना है कि इसके पीछे वायु प्रदूषण एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है। लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों की कोशिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। समस्तीपुर जैसे जिले में बढ़ते वाहन, सड़क निर्माण से उड़ने वाली धूल, ईंट-भट्ठों का धुआं, कचरा जलाना, पराली जलाना और तंबाकू-धूम्रपान जैसी आदतें फेफड़ों के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं। डॉक्टर का कहना है कि इन कारणों से आने वाले वर्षों में मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है यदि समय रहते रोकथाम नहीं की गई।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज :

तीन सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी रहना

खांसी में खून आना

सांस फूलना

सीने में लगातार दर्द

आवाज बैठ जाना

बिना कारण वजन घटना

लगातार थकान महसूस होना

बचाव के उपाय :

धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।

प्रदूषण वाले क्षेत्रों में मास्क का उपयोग करें।

घर और कार्यस्थल पर स्वच्छ हवा का ध्यान रखें।

नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाएं।

लगातार खांसी या सांस की समस्या होने पर तुरंत जांच कराएं।

अधिक जोखिम वाले लोगों को चिकित्सकीय सलाह पर

समय-समय पर फेफड़ों की जांच करानी चाहिए।

विशेषज्ञों की सलाह :

लंग कैंसर का समय पर पता चल जाए तो इसका सफल उपचार संभव है। इसलिए लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विश्व लंग कैंसर दिवस का उद्देश्य भी लोगों में जागरूकता बढ़ाना और समय पर जांच व उपचार के लिए प्रेरित करना है।

– डॉ. महेश कुमार ठाकुर, कृष्णा हॉस्पिटल, समस्तीपुर

 

By Manish