समस्तीपुर : मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी और उद्यमी बनाने के लिए अब दूसरी किस्त जारी की जाएगी। प्रथम चरण की सफलता और जमीन पर दिखे सकारात्मक बदलावों का मूल्यांकन करने के बाद, प्रशासन ने अब तक जिले की लगभग 3800 महिलाओं का चयन दूसरी किस्त के लिए कर लिया है। इस बार चयनित लाभार्थियों के खातों में 20-20 हजार रुपये की सहायता राशि भेजी जाएगी। खास बात यह है कि पहली किस्त की तरह यह राशि भी पूरी तरह अनुदान के रूप में होगी, जिसे सरकार को वापस नहीं करना होगा।
जीविका के सूचक प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि दूसरी किस्त के लिए लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से पारदर्शिता और सत्यापन के आधार पर किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने नौ महत्वपूर्ण बिंदु तय किए हैं, जिन पर हर लाभार्थी की गतिविधि का मूल्यांकन किया जा रहा है। इन मानकों में पहली किस्त की राशि का सही और नियमानुकूल उपयोग, वर्तमान में संचालित व्यवसाय या रोजगार की वास्तविक स्थिति, स्वयं सहायता समूह की बैठकों में महिलाओं की नियमित उपस्थिति, बैंकिंग लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता, आजीविका से जुड़े कार्यों में निरंतरता और निर्धारित सरकारी नियमों का अनुपालन शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय टीमों द्वारा लाभार्थियों के घरों और उनके कार्यस्थलों पर जाकर भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
मौके पर यह देखा जा रहा है कि महिलाओं ने पहली किस्त के 10 हजार रुपये से वास्तव में कोई रोजगार शुरू किया है या नहीं। इस गहन जांच के बाद ही दूसरी किस्त के लिए अंतिम हरी झंडी दी जा रही है। इस योजना के तहत जिले की 6 लाख 43 हजार 551 महिलाओं को पहली किस्त के रूप में 10-10 हजार रुपये दिए गए थे। इस राशि का उपयोग ग्रामीण महिलाओं ने अपने पुराने छोटे-मोटे धंधों को बढ़ाने या नए स्वरोजगार की शुरुआत करने में किया है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि अधिकांश महिलाओं ने बकरी पालन, मुर्गी पालन, श्रृंगार प्रसाधन की दुकान, किराना दुकान, सब्जी उत्पादन व बिक्री तथा सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों को अपनी आजीविका का जरिया बनाया है। इससे न केवल महिलाओं की व्यक्तिगत आय में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी पहले से काफी मजबूत हुई है।
कारोबार बढ़ाने पर ही मिलेगा अगला लाभ :
सरकार का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ एकमुश्त आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि उन्हें एक स्थायी उद्यमी के रूप में स्थापित करना है। अधिकारियों ने साफ किया है कि इस 20 हजार रुपये की दूसरी किस्त का लाभ उठाने के बाद, यदि कोई महिला अगले चरण (तीसरे चरण) की सहायता राशि पाना चाहती है, तो उसे अपने व्यवसाय को और बड़े स्तर पर ले जाना होगा। इसके लिए लाभार्थी दीदी को कम से कम 25 हजार रुपये के कारोबार का ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। दूसरी ओर विभाग उन 16 हजार महिलाओं के खातों में भी जल्द से जल्द पहली किस्त भेजने की कवायद में जुटा है, जो किन्हीं कारणों से अब तक इससे वंचित रह गई थीं।