समस्तीपुर : सदर अस्पताल में वर्षों से हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि पिछले महीने ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से सदर अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ और तीन फिजिशियन डॉक्टरों की तैनाती का नोटिफिकेशन जारी किया गया था, लेकिन अब तक पांचों में से किसी भी डॉक्टर ने भी सदर अस्पताल में योगदान नहीं किया है। इसके कारण पद कागज पर भरे होने के बावजूद मरीजों को हड्डी रोग विशेषज्ञ की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
ऑर्थोपेडिक डॉक्टर के अभाव में सदर अस्पताल पहुंचने वाले फ्रैक्चर, गंभीर चोट, हड्डी खिसकने, जोड़ों की समस्या और दुर्घटना में घायल मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। रोजाना दर्जनों मरीज हड्डी से जुड़ी समस्या लेकर सदर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन हड्डी के डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। गंभीर मामलों में मरीजों को डीएमसीएच, पीएमसीएच या अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है।
सदर अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद मरीजों के सामने निजी अस्पताल का विकल्प भी रहता है, लेकिन वहां इलाज का खर्च काफी अधिक होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को उठानी पड़ती है। एक्स-रे, प्लास्टर, दवा और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन समेत अन्य उपचार पर उन्हें हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज सरकारी अस्पताल में कम खर्च में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर के नहीं मिलने पर उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई मरीज आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज में देरी भी करते हैं।
पिछले महीने जारी हुआ था डॉक्टरों की तैनाती का आदेश :
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पिछले महीने 20 जुलाई को सदर अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञों की तैनाती का आदेश जारी किया गया था। इसके साथ ही तीन फिजिशियन डॉक्टरों की भी पदस्थापना की गई थी। विभागीय नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उम्मीद जगी थी कि वर्षों से चली आ रही विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर होगी और मरीजों को जिला मुख्यालय में ही बेहतर उपचार मिल सकेगा। लेकिन अब तक किसी भी डॉक्टर के योगदान नहीं करने से अस्पताल में स्थिति जस की तस बनी हुई है। डॉक्टरों के योगदान नहीं करने के कारण संबंधित पद खाली पड़े हैं।
स्वास्थ्य विभाग को कई बार भेजा जा चुका है प्रस्ताव :
सदर अस्पताल प्रशासन की ओर से हड्डी रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता को लेकर स्वास्थ्य विभाग को कई बार प्रस्ताव और पत्राचार किया जा चुका है। अस्पताल में ऑर्थोपेडिक डॉक्टर नहीं होने से गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। इसके बावजूद तैनाती के बाद भी डॉक्टरों के योगदान नहीं करने से समस्या का समाधान नहीं हो सका है। अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ की कमी का असर सिर्फ सामान्य मरीजों पर ही नहीं, बल्कि दुर्घटना और मारपीट के मामलों की मेडिकल जांच पर भी पड़ रहा है।
पुलिस जांच भी हो रही प्रभावित :
सड़क दुर्घटना, मारपीट और अन्य मामलों में घायल मरीजों की मेडिकल जांच के दौरान कई बार हड्डी में चोट या फ्रैक्चर की स्थिति स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय की जरूरत होती है। सदर अस्पताल में ऑर्थोपेडिक डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण ऐसे मामलों में भी परेशानी सामने आती है। मरीजों को विशेषज्ञ जांच के लिए दूसरे अस्पताल भेजना पड़ता है। इससे पुलिस की जांच प्रक्रिया में भी देरी होती है और मेडिकल रिपोर्ट मिलने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
पदस्थापना के बाद भी नहीं मिला मरीजों को लाभ :
सदर अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ क्रमशः डॉ. निहाल निहल एवं डॉ. शालू गुप्ता और तीन फिजिशियन क्रमशः डॉ. रवि रंजन, डॉ. विभास कुमार एवं डॉ. सौरव प्रतिक सिंह की तैनाती से जिले के लोगों को उम्मीद थी कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। खासकर हड्डी रोग विशेषज्ञों की तैनाती से दुर्घटना में घायल मरीजों, फ्रैक्चर और जोड़ संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को जिला मुख्यालय में ही इलाज मिलने की संभावना थी। लेकिन नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद डॉक्टरों के योगदान नहीं करने से यह सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी है। नतीजतन वर्षों से चली आ रही समस्या बरकरार है और मरीजों को सदर अस्पताल से वापस लौटना पड़ रहा है।
बयान :
डॉक्टरों की तैनाती का नोटिफिकेशन स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किया गया था। सदर अस्पताल में योगदान को लेकर संबंधित डॉक्टरों से संपर्क किया जा रहा है। डॉक्टरों के योगदान करते ही मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। लेकिन अब तक किसी भी डाॅक्टर ने योगदान नहीं दिया है।
राजीव कुमार, सिविल सर्जन, समस्तीपुर